Ek Chotisi Kavita


“टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी,

अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी I

हार नहीं मानूंगा , रार नई ठानूंगा ,

काल के कपाल पर लिखता – मिटाता हूँ I

गीत नया गाता हूँ I ” — अटल बिहारी वाजपेयी

Ek Chotisi Kavita


“टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी,

अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी I

हार नहीं मानूंगा , रार नई ठानूंगा ,

काल के कपाल पर लिखता – मिटाता हूँ I

गीत नया गाता हूँ I ” — अटल बिहारी वाजपेयी